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mahabharat 5.64.7: शिकारी बोला - "ऋषिवर! ये दोनों पक्षी आपस में मिलकर मेरा एकमात्र जाल छीन ले जा रहे हैं। अब ये जहाँ भी आपस में लड़ेंगे, मेरे अधीन हो जाएँगे।"   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.64.7 
शाकुनिक उवाच
पाशमेकमुभावेतौ सहितौ हरतो मम।
यत्र वै विवदिष्येते तत्र मे वशमेष्यत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शिकारी बोला - "ऋषिवर! ये दोनों पक्षी आपस में मिलकर मेरा एकमात्र जाल छीन ले जा रहे हैं। अब ये जहाँ भी आपस में लड़ेंगे, मेरे अधीन हो जाएँगे।"
 
The hunter said - Sage! These two birds have joined forces and are taking away my only net. Now wherever they fight with each other, they will come under my control. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)