श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.64.27 
अङ्के कुरुष्व राजानं धृतराष्ट्र युधिष्ठिरम्।
युध्यतोर्हि द्वयोर्युद्धे नैकान्तेन भवेज्जय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज धृतराष्ट्र! आपको राजा युधिष्ठिर को अपनी गोद में बिठा लेना चाहिए, क्योंकि जब दोनों पक्षों में युद्ध छिड़ जाता है, तो यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि कौन जीतेगा॥ 27॥
 
Maharaja Dhritarashtra! You should make King Yudhishthira sit on your lap because when a war breaks out between the two sides, it cannot be said with certainty who will win.॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि विदुरवाक्ये चतु:षष्टितमोऽध्याय:॥ ६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें विदुरवाक्यविषयक चौसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)