श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.64.23 
दुर्योधनो योद्‍धुमना: समरे सव्यसाचिना।
न च पश्यामि तेजोऽस्य विक्रमं वा तथाविधम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन युद्धभूमि में सव्यसाची अर्जुन के साथ युद्ध करने की सोचता है, परंतु मैं उसमें अर्जुन के समान तेज या पराक्रम नहीं देखता हूँ ॥23॥
 
Duryodhana thinks of fighting with Savyasachi Arjuna in the battlefield, but I do not see in him the same brilliance or bravery as Arjuna. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)