Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.64.12: जो शुद्ध हृदय वाले मनुष्य समय-समय पर बड़ों की सेवा और संगति करते हैं, वे सिंहों से सुरक्षित वन के समान दूसरों के लिए दुर्जेय हो जाते हैं (शत्रु उनके पास आने का साहस नहीं करते)।॥12॥ | mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये स्म काले सुमनस: सर्वे वृद्धानुपासते।
सिंहगुप्तमिवारण्यमप्रधृष्या भवन्ति ते॥ १२॥
अनुवाद
जो शुद्ध हृदय वाले मनुष्य समय-समय पर बड़ों की सेवा और संगति करते हैं, वे सिंहों से सुरक्षित वन के समान दूसरों के लिए दुर्जेय हो जाते हैं (शत्रु उनके पास आने का साहस नहीं करते)।॥12॥
Those pure-hearted people who from time to time serve and keep company with the elders become formidable for others like a forest protected by lions (the enemies do not dare to come near them).॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥