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mahabharat 5.64.10: इसी प्रकार जो परिवार के सदस्य धन के लिए आपस में झगड़ते हैं, वे लड़कर उन दो पक्षियों के समान शत्रुओं के हाथ में पड़ जाते हैं ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.64.10 
एवं ये ज्ञातयोऽर्थेषु मिथो गच्छन्ति विग्रहम्।
तेऽमित्रवशमायान्ति शकुनाविव विग्रहात्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो परिवार के सदस्य धन के लिए आपस में झगड़ते हैं, वे लड़कर उन दो पक्षियों के समान शत्रुओं के हाथ में पड़ जाते हैं ॥10॥
 
Similarly, family members who quarrel among themselves for wealth, after fighting, fall into the hands of the enemies like those two birds. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)