Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.62.18: जनमेजय! जब भीष्म ने ऐसा कहा और कर्ण अपने अस्त्र फेंककर चला गया, तब धृतराष्ट्रपुत्र मंदबुद्धि दुर्योधन ने शान्तनुपुत्र भीष्म से इस प्रकार कहा॥18॥ | mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथोक्तवाक्ये नृपतीन्द्र भीष्मे
निक्षिप्य शस्त्राणि गते च कर्णे।
वैचित्रवीर्यस्य सुतोऽल्पबुद्धि-
र्दुर्योधन: शान्तनवं बभाषे॥ १८॥
अनुवाद
जनमेजय! जब भीष्म ने ऐसा कहा और कर्ण अपने अस्त्र फेंककर चला गया, तब धृतराष्ट्रपुत्र मंदबुद्धि दुर्योधन ने शान्तनुपुत्र भीष्म से इस प्रकार कहा॥18॥
Janamejaya! When Bhishma said this and Karna threw away his weapons and went away, then the dull-witted Duryodhana, son of Dhritarashtra, spoke thus to Shantanu's son Bhishma.॥ 18॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि कर्णभीष्मवाक्ये द्विषष्टितमोऽध्याय:॥ ६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें कर्ण और भीष्मके वचनविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥