यदा ह्यग्निश्च वायुश्च धर्म इन्द्रोऽश्विनावपि।
कामयोगात् प्रवर्तेरन् न पार्था दु:खमाप्नुयु:॥ ६॥
अनुवाद
यदि अग्नि, वायु, धर्म, इन्द्र और दोनों अश्विन काम के वशीभूत होकर समस्त कार्यों में लगे रहते, तो कुन्तीपुत्रों को कभी दुःख न भोगना पड़ता॥6॥
If Agni, Vayu, Dharma, Indra and the two Ashvins had been under the influence of desire and had engaged themselves in all activities, then the sons of Kunti would never have had to suffer.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥