श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 61: दुर्योधनद्वारा आत्मप्रशंसा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.61.27 
परा बुद्धि: परं तेजो वीर्यं च परमं मम।
परा विद्या परो योगो मम तेभ्यो विशिष्यते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मेरी बुद्धि उत्तम है, मेरा तेज महान है, मेरा बल और पराक्रम महान है, मेरा ज्ञान विशाल है और मेरा परिश्रम भी श्रेष्ठ है। ये सब वस्तुएँ मुझमें पाण्डवों से भी अधिक हैं॥ 27॥
 
‘My intellect is excellent, my brilliance is superb, my strength and valour are great, my knowledge is vast and my hard work is also the best. I have more of all these things than the Pandavas.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)