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श्लोक 5.6.9-10h  |
विदुरश्चापि तद् वाक्यं साधयिष्यति तावकम्॥ ९॥
भीष्मद्रोणकृपादीनां भेदं संजनयिष्यति। |
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| अनुवाद |
| वहाँ विदुर जी भी तुम्हारी बातों का समर्थन करेंगे और तुम भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य आदि में मतभेद उत्पन्न करोगे ॥9 1/2॥ |
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| Vidur ji will also support your words there and you will create differences between Bhishma, Drona and Kripacharya etc. ॥ 9 1/2॥ |
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