Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.6.14-16h: आप धर्मात्मा हैं, अतः धर्मानुसार आचरण करते हुए कौरवकुल के दयालु वृद्धजनों को पूर्वजों द्वारा पालन किए जाने वाले कुलधर्म और पाण्डवों के कष्टों का वर्णन कीजिए। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि आप इस प्रकार उनका मन दुर्योधन से हटा देंगे। ॥14-15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.6: द्रुपदका पुरोहितको दौत्यकर्मके लिये अनुमति देना तथा पुरोहितका हस्तिनापुरको प्रस्थान । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स भवान् धर्मयुक्तश्च धर्म्यं तेषु समाचरन्॥ १४॥
कृपालुषु परिक्लेशान् पाण्डवीयान् प्रकीर्तयन्।
वृद्धेषु कुलधर्मं च ब्रुवन् पूर्वैरनुष्ठितम्॥ १५॥
विभेत्स्यति मनांस्येषामिति मे नात्र संशय:।
अनुवाद
आप धर्मात्मा हैं, अतः धर्मानुसार आचरण करते हुए कौरवकुल के दयालु वृद्धजनों को पूर्वजों द्वारा पालन किए जाने वाले कुलधर्म और पाण्डवों के कष्टों का वर्णन कीजिए। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि आप इस प्रकार उनका मन दुर्योधन से हटा देंगे। ॥14-15 1/2॥
You are a religious person, so while behaving in accordance with the religion, you should explain the family dharma followed by the ancestors and the sufferings of the Pandavas to the kind-hearted elders of the Kaurava clan. I have no doubt that you will turn their mind away from Duryodhan in this way. ॥14-15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥