श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 59: संजयका धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें श्रीकृष्ण और अर्जुनके अन्त:पुरमें कहे हुए संदेश सुनाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.59.23 
तेजोमयं दुराधर्षं गाण्डीवं यस्य कार्मुकम्।
मद्‍‍‍द्वितीयेन तेनेह वैरं व: सव्यसाचिना॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तूने यहाँ उसी अर्जुन से शत्रुता उत्पन्न की है, जिसके पास अजेय और तेजस्वी गाण्डीव धनुष है और जिसका मित्र या सहायक मैं हूँ॥ 23॥
 
You have created enmity here against that very Arjuna, who possesses the invincible and brilliant bow called Gandiva and whose friend or helper is me.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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