श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 59: संजयका धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें श्रीकृष्ण और अर्जुनके अन्त:पुरमें कहे हुए संदेश सुनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.59.17 
वाचं तां वचनार्हस्य शिक्षाक्षरसमन्विताम्।
अश्रौषमहमिष्टार्थां पश्चाद्‍धृदयहारिणीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मैंने भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुने, जो वार्तालाप में कुशल थे, जिनका प्रत्येक शब्द शिक्षाप्रद था, जो इच्छित अर्थ प्रकट करने वाला और मन को मोहित करने वाला था॥ 17॥
 
Thereafter I heard the words of Lord Krishna, who was skilled in conversation, every word of which was instructive. It conveyed the desired meaning and captivated the mind.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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