श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 59: संजयका धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें श्रीकृष्ण और अर्जुनके अन्त:पुरमें कहे हुए संदेश सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.59.12 
निदेशस्थाविमौ यस्य मानसस्तस्य सेत्स्यते।
संकल्पो धर्मराजस्य निश्चयो मे तदाभवत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ये दोनों महात्मा धर्मराज युधिष्ठिर की आज्ञा का पालन करने में सदैव तत्पर रहते हैं, और उस समय मेरा भी यही निश्चय था ॥12॥
 
These two great souls are always ready to obey the orders of Dharmaraja Yudhishthira, and this was my determination at that time. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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