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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन
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श्लोक 15
श्लोक
5.57.15
अर्जुनस्य तु भागेन कर्णो वैकर्तनो मत:।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सैन्धवश्च जयद्रथ:॥ १५॥
अनुवाद
वैकर्तन कर्ण, अश्वत्थामा, विकर्ण और सिन्धुराज जयद्रथ- ये सभी अर्जुन के हिस्से में आये। 15॥
Vaikartan Karna, Ashwatthama, Vikarna and Sindhuraj Jayadratha - all these fell in Arjun's share. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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