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mahabharat 5.56.7: संजय ने कहा- प्रजानाथ! विश्वकर्मा त्वष्टा तथा प्रजापति ने इन्द्र के साथ मिलकर अर्जुन के रथ की ध्वजा में अनेक प्रकार के रूप उत्पन्न किये हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.56.7 
संजय उवाच
भौमन: सह शक्रेण बहुचित्रं विशाम्पते।
रूपाणि कल्पयामास त्वष्टा धाता सदा विभो॥ ७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- प्रजानाथ! विश्वकर्मा त्वष्टा तथा प्रजापति ने इन्द्र के साथ मिलकर अर्जुन के रथ की ध्वजा में अनेक प्रकार के रूप उत्पन्न किये हैं॥7॥
 
Sanjay said- Prajanath! Vishwakarma Tvashta and Prajapati along with Indra have created many types of forms in the flag of Arjuna's chariot. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)