श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.56.2 
संजय उवाच
अतीव मुदितो राजन् युद्धप्रेप्सुर्युधिष्ठिर:।
भीमसेनार्जुनौ चोभौ यमावपि न बिभ्यत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! युधिष्ठिर युद्ध की इच्छा से हृदय में अत्यन्त प्रसन्न हो रहे हैं। भीमसेन, अर्जुन तथा दोनों भाई नकुल और सहदेव भी भयभीत नहीं हैं।
 
Sanjaya said, "O King! Yudhishthira is feeling very happy in his heart with the desire of fighting. Bhimasena, Arjuna and the two brothers Nakula and Sahadeva are also not afraid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)