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mahabharat 5.56.16: अजमीढ़कुल के पुत्र! देवराज इन्द्र द्वारा दिए गए हरे रंग के उत्तम घोड़े, जो वायु के समान बलवान और वेगवान हैं, माद्रीपुत्र वीर नकुल के रथ का भार उसी प्रकार वहन करते हैं, जैसे वे पहले वृत्रशत्रु देवेन्द्र का भार वहन करते थे॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 5.56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.56.16 
माद्रीपुत्रं नकुलं त्वाजमीढ
महेन्द्रदत्ता हरयो वाजिमुख्या:।
समा वायोर्बलवन्तस्तरस्विनो
वहन्ति वीरं वृत्रशत्रुं यथेन्द्रम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अजमीढ़कुल के पुत्र! देवराज इन्द्र द्वारा दिए गए हरे रंग के उत्तम घोड़े, जो वायु के समान बलवान और वेगवान हैं, माद्रीपुत्र वीर नकुल के रथ का भार उसी प्रकार वहन करते हैं, जैसे वे पहले वृत्रशत्रु देवेन्द्र का भार वहन करते थे॥ 16॥
 
Son of Ajamidhkul! The excellent horses of green colour, given by Devraj Indra, which are as strong and swift as the wind, carry the load of the chariot of the brave Nakula, son of Madri. Just like they used to bear the load of Vritrashatru Devendra earlier.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)