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पुरैकेन हि भीष्मेण विजिता: सर्वपार्थिवा:।
मृते पितर्यतिक्रुद्धो रथेनैकेन भारत॥ २०॥
अनुवाद
हे भारत! बहुत समय पहले की बात है, जब अपने पिता शांतनु की मृत्यु के पश्चात भीष्मजी ने क्रोध में आकर अकेले ही एक रथ की सहायता से समस्त राजाओं को परास्त कर दिया था।
Bhaarat! It happened long ago, after the death of his father Shantanu, Bhishmaji, in a fit of rage, single-handedly defeated all the kings with the help of a single chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥