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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.55.10 
समुच्छेदं च कृत्स्नं न: कृत्वा तात जनार्दन:।
एकराज्यं कुरूणां स्म चिकीर्षति युधिष्ठिरे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! श्रीकृष्ण हमारा समूल नाश करके कौरवों का राज्य बनाकर उसे युधिष्ठिर को सौंपना चाहते हैं।
 
‘Father! Shri Krishna wants to destroy us completely and create a kingdom of the Kauravas and hand it over to Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)