श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.54.1 
संजय उवाच
एवमेतन्महाराज यथा वदसि भारत।
युद्धे विनाश: क्षत्रस्य गाण्डीवेन प्रदृश्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा— महाराज! आप ठीक कह रहे हैं। भरत! युद्ध में गाण्डीव धनुष से क्षत्रिय जाति का विनाश ही देखा जाता है।॥1॥
 
Sanjaya said— Maharaj! What you are saying is correct. Bharata! In the war, only the destruction of the Kshatriya community is seen by the Gandiva bow.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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