श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.52.3 
अस्यत: कर्णिनालीकान् मार्गणान् हृदयच्छिद:।
प्रत्येता न सम: कश्चिद् युधि गाण्डीवधन्वन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में गांडीवधारी अर्जुन के समान कोई योद्धा नहीं है, जो हृदय को छेदने वाले कर्णी और नालिका आदि बाणों की निरन्तर वर्षा करता है।॥3॥
 
There is no warrior equal to Gandiva-wielding Arjuna in battle who unceasingly showers arrows like the Karni and Naalika etc. that pierce the heart. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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