श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.52.13-14h 
नैवास्ति नो धनुस्तादृक् न योद्धा न च सारथि:॥ १३॥
तच्च मन्दा न जानन्ति दुर्योधनवशानुगा:।
 
 
अनुवाद
हमारे पास न तो ऐसा धनुष है, न अर्जुन जैसा पराक्रमी योद्धा है, न भगवान श्रीकृष्ण जैसा सारथी है, परन्तु दुर्योधन के प्रभाव में आकर मेरे मूर्ख पुत्र इस बात को समझने में असमर्थ हैं।॥13 1/2॥
 
We neither have such a bow, nor a mighty warrior like Arjun, nor a charioteer like Lord Krishna, but my foolish sons, under the influence of Duryodhan, are unable to understand this. ॥ 13 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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