श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.52.1 
धृतराष्ट्र उवाच
यस्य वै नानृता वाच: कदाचिदनुशुश्रुम।
त्रैलोक्यमपि तस्य स्याद् योद्धा यस्य धनंजय:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय! मैंने कभी किसी के मुँह से झूठ बोलते नहीं सुना और जिसके पक्ष में धनंजय जैसे योद्धा हों। वह धर्मराज युधिष्ठिर तीनों लोकों का राज्य (संपूर्ण पृथ्वी का तो क्या) प्राप्त कर सकता है।"
 
Dhritarashtra said, "Sanjay! I have never heard a lie come out of someone's mouth and who has warriors like Dhananjaya on his side. That Dharmaraja Yudhishthir can get the kingdom of all the three worlds (let alone the entire world)."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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