श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.51.53 
न तु मन्ये विघाताय ज्ञानं दु:खस्य संजय।
भवत्यतिबलं ह्येतज्ज्ञानस्याप्युपघातकम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
संजय! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि ज्ञान दुःख का नाश नहीं कर सकता; अपितु घोर दुःख ही ज्ञान का नाश करने वाला हो जाता है ॥53॥
 
Sanjay! It seems to me that knowledge cannot destroy sorrow; rather, intense sorrow itself becomes the destroyer of knowledge. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)