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mahabharat 5.50.44-45: शिशुपाल का महारथी पुत्र धृष्टकेतु, जिसका पराक्रम अद्वितीय है, युद्धभूमि में कुपित होकर शत्रुओं के लिए कष्टकारक बन जाता है। पाण्डव उस चेदिराज के साथ तुम पर आक्रमण करने की तैयारी कर रहे हैं। वह एक अक्षौहिणी सेना लेकर पाण्डवों के पक्ष में आ खड़ा हुआ है। ॥44-45॥   |   mahabharat अध्याय 5.50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  5.50.44-45 
यश्चैवाप्रतिमो वीर्ये धृष्टकेतुर्महायशा:।
दु:सह: समरे क्रुद्ध: शैशुपालिर्महारथ:॥ ४४॥
तेन वश्चेदिराजेन पाण्डवा अभ्ययुञ्जत।
अक्षौहिण्या परिवृत: पाण्डवान् योऽभिसंश्रित:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
शिशुपाल का महारथी पुत्र धृष्टकेतु, जिसका पराक्रम अद्वितीय है, युद्धभूमि में कुपित होकर शत्रुओं के लिए कष्टकारक बन जाता है। पाण्डव उस चेदिराज के साथ तुम पर आक्रमण करने की तैयारी कर रहे हैं। वह एक अक्षौहिणी सेना लेकर पाण्डवों के पक्ष में आ खड़ा हुआ है। ॥44-45॥
 
Dhrishtaketu, the great warrior son of Shishupal, whose valour is unmatched, becomes a nuisance for the enemies when enraged in the battlefield. The Pandavas are preparing to attack you along with that Chediraj. He has come with an Akshauhini army and has joined the Pandavas' side. ॥ 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)