श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.50.37 
यं यक्ष: पुरुषं चक्रे भीष्मस्य निधनेच्छया।
महेष्वासेन रौद्रेण पाण्डवा अभ्ययुञ्जत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव उस भयंकर एवं महाधनुर्धर शिखण्डी के बल पर तुम्हारे साथ युद्ध करने के लिए तैयार हैं, जो यक्ष स्थूनाकर्ण द्वारा पुरुषरूपी बनाये गये भीष्म को मारना चाहता था।
 
The Pandavas are ready to fight with you on the strength of that fierce and great archer Shikhandi, who wanted to kill Bhishma, who was transformed into a man by Yaksha Sthunakarna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)