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mahabharat 5.50.32-33: राजन! इस संसार में जो बल और पराक्रम में समतुल्य हैं, जो माद्री को आनन्द देने वाले हैं तथा पाण्डवों में सबसे छोटे हैं, उन पुरुषोत्तम सहदेव, उन चार पुरुषों के साथ तुम्हारा और अत्यन्त विनाशकारी युद्ध होने वाला है।   |   mahabharat अध्याय 5.50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  5.50.32-33 
यस्य वीर्येण सदृशाश्चत्वारो भुवि मानवा:।
अश्वत्थामा धृष्टकेतू रुक्मी प्रद्युम्न एव च॥ ३२॥
तेन व: सहदेवेन युद्धं राजन् महात्ययम्।
यवीयसा नृवीरेण माद्रीनन्दिकरेण च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस संसार में जो बल और पराक्रम में समतुल्य हैं, जो माद्री को आनन्द देने वाले हैं तथा पाण्डवों में सबसे छोटे हैं, उन पुरुषोत्तम सहदेव, उन चार पुरुषों के साथ तुम्हारा और अत्यन्त विनाशकारी युद्ध होने वाला है।
 
Rajan! There is going to be a very destructive war between you and those four men in this world, Ashwatthama, Dhrishketu, Rukmi and Pradyumna, who can be equaled in strength and valor, who gives joy to Madri and is the youngest among the Pandavas, that best of men, Sahadev. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)