श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.49.9 
एतौ हि कर्मणा लोकं नन्दयामासतुर्ध्रुवम्।
द्विधाभूतौ महाप्राज्ञौ विद्धि ब्रह्मन् परंतपौ।
असुराणां विनाशाय देवगन्धर्वपूजितौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने पुण्य कर्मों से निश्चय ही सम्पूर्ण जगत् का सुख बढ़ाया है । ब्रह्मन् ! वे दोनों ही अत्यंत बुद्धिमान हैं और अपने शत्रुओं को कष्ट पहुँचाने में समर्थ हैं । एक होते हुए भी उन्होंने दैत्यों का नाश करने के लिए दो शरीर धारण किए हैं । समस्त देवता और गन्धर्व उनकी पूजा करते हैं । 9॥
 
He has certainly increased the happiness of the entire world with his good deeds. Brahman! Both of them are extremely intelligent and can cause trouble to their enemies. Despite being one, he has taken two bodies to destroy the demons. All the gods and Gandharvas worship him. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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