श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.49.7-8 
ब्रह्मोवाच
यावेतौ पृथिवीं द्यां च भासयन्तौ तपस्विनौ।
ज्वलन्तौ रोचमानौ च व्याप्यातीतौ महाबलौ॥ ७॥
नरनारायणावेतौ लोकाल्लोकं समास्थितौ।
ऊर्जितौ स्वेन तपसा महासत्त्वपराक्रमौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - बृहस्पते! ये दो महान् पराक्रमी तपस्वी, जो हमसे पार होकर पृथ्वी और आकाश को प्रकाशित कर रहे हैं, नर और नारायण हैं। ये अपने तेज से प्रज्वलित हो रहे हैं और चमक रहे हैं। इनका धैर्य और पराक्रम महान है। इनकी तपस्या अत्यन्त प्रभावशाली होने के कारण ये भूलोक से ब्रह्मलोक में आ गए हैं। 7-8॥
 
Brahmaji said – Jupiter! These two great and powerful ascetics who have transcended us, illuminating the earth and the sky, are Nara and Narayana. They are blazing with their brilliance and shining brightly. Their patience and bravery are great. Due to his penance being very effective, he has come from Bhooloka to Brahmaloka. 7-8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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