Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.49.44: हे मनुष्यों के स्वामी! भरतवंशी भीष्मजी ने जो कहा है, वैसा ही करो। धन और काम के लोभी मनुष्यों की बातें मत सुनो॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदाह भरतश्रेष्ठो भीष्मस्तत् क्रियतां नृप।
न काममर्थलिप्सूनां वचनं कर्तुमर्हसि॥ ४४॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! भरतवंशी भीष्मजी ने जो कहा है, वैसा ही करो। धन और काम के लोभी मनुष्यों की बातें मत सुनो॥ 44॥
‘O Lord of men! Do what Bheeshmaji, the scion of the Bharat clan, has said. You should not listen to the words of those who are greedy for money and sex.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥