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mahabharat 5.49.40: ‘जब गन्धर्व लोग आपके पुत्र को बारात में बंदी बनाकर ले जा रहे थे, तब यह सारथिपुत्र कहाँ था, जो अब बैल के समान गरज रहा है?॥40॥   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.49.40 
गन्धर्वैर्घोषयात्रायां ह्रियते यत् सुतस्तव।
क्व तदा सूतपुत्रोऽभूद् य इदानीं वृषायते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘जब गन्धर्व लोग आपके पुत्र को बारात में बंदी बनाकर ले जा रहे थे, तब यह सारथिपुत्र कहाँ था, जो अब बैल के समान गरज रहा है?॥40॥
 
‘When the Gandharvas were taking your son captive during the procession, where was this son of a charioteer who is now bellowing like a bull?॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)