श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.49.4 
नमस्कृत्योपजग्मुस्ते लोकवृद्धं पितामहम्।
परिवार्य च विश्वेशं पर्यासत दिवौकस:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ये सब देवता जगत के पितामह ब्रह्माजी के पास गए और उन्हें प्रणाम करके उन लोकेश्वर को सब ओर से घेरकर बैठ गए॥4॥
 
All these gods went to the great grandfather of the world Brahmaji and after paying obeisance to him, sat down surrounding that Lokeshwar from all sides. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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