श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.49.38 
दृष्ट्वा विराटनगरे भ्रातरं निहतं प्रियम्।
धनंजयेन विक्रम्य किमनेन तदा कृतम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘जब अर्जुन ने विराटनगर में अपना पराक्रम दिखाया और उसके सामने ही उसके प्रिय भाई का वध किया, तब अपनी आँखों से देखकर भी उसने अर्जुन का क्या बिगाड़ा था?॥ 38॥
 
‘When Arjuna displayed his valour in Viratnagar and killed his beloved brother in front of him, what harm did he do to Arjun even after seeing it with his own eyes?॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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