श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.49.35 
अनयो योऽयमागन्ता पुत्राणां ते दुरात्मनाम्।
तदस्य कर्म जानीहि सूतपुत्रस्य दुर्मते:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अन्याय के फलस्वरूप जो यह महान संकट आपके दुष्ट पुत्रों पर आने वाला है, उसे आप इस भ्रष्ट बुद्धि वाले सूत पुत्र कर्ण का ही सब कार्य समझिए ॥35॥
 
Consider this great crisis that is about to happen to your evil sons as a result of injustice, all the work of this corrupt minded Suta son Karna. 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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