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श्लोक 5.49.35  |
अनयो योऽयमागन्ता पुत्राणां ते दुरात्मनाम्।
तदस्य कर्म जानीहि सूतपुत्रस्य दुर्मते:॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| अन्याय के फलस्वरूप जो यह महान संकट आपके दुष्ट पुत्रों पर आने वाला है, उसे आप इस भ्रष्ट बुद्धि वाले सूत पुत्र कर्ण का ही सब कार्य समझिए ॥35॥ |
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| Consider this great crisis that is about to happen to your evil sons as a result of injustice, all the work of this corrupt minded Suta son Karna. 35॥ |
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