श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.49.26 
न चेद् ग्रहीष्यसे वाक्यं श्रोतासि सुबहून् हतान्।
तवैव हि मतं सर्वे कुरव: पर्युपासते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे तो एक दिन तुम सुनोगे कि हमारे बहुत से सम्बन्धी मारे गए हैं, क्योंकि सभी कौरव तुम्हारे मत का पालन करते हैं॥ 26॥
 
If you do not obey me, then one day you will hear that many of our relatives have been killed because all the Kauravas follow your opinion.॥ 26॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas