श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.49.25 
नोचेदयमभाव: स्यात् कुरूणां प्रत्युपस्थित:।
अर्थाच्च तात धर्माच्च तव बुद्धिरुपप्लुता॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे तो समझ लो कि कौरवों का विनाश अवश्य होगा। हे प्रिये! तुम्हारी बुद्धि धन और धर्म दोनों से भ्रष्ट हो गई है।
 
If you do not listen to me, then understand that the destruction of the Kauravas will surely come. O dear! Your intellect has been corrupted by both wealth and religion. 25.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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