श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.49.22 
तस्मात् कर्मैव कर्तव्यमिति होवाच नारद:।
एतद्धि सर्वमाचष्ट वृष्णिचक्रस्य वेदवित्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
दुष्टों का दमन करना, सज्जनों और धर्म की रक्षा करना ही उनका कर्तव्य है। ये सारी बातें वेदों के ज्ञाता नारद जी ने समस्त वृष्णिवंशियों के समक्ष कही थीं।
 
Suppressing the wicked, protecting the virtuous and the religion is their duty. All these things were said by Narada, the knower of the Vedas, in front of all the Vrishni clan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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