श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.49.20 
अजेयौ मानुषे लोके सेन्द्रैरपि सुरासुरै:।
एष नारायण: कृष्ण: फाल्गुनश्च नर: स्मृत:।
नारायणो नरश्चैव सत्त्वमेकं द्विधा कृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस मानव लोक में इंद्र सहित समस्त देवता और दानव भी उन्हें पराजित नहीं कर सकते। वे श्री कृष्ण नारायण हैं और अर्जुन मानव माने जाते हैं। नारायण और मानव एक ही हैं, किन्तु लोक कल्याण के लिए वे दो शरीर धारण करके प्रकट हुए हैं।
 
In this human world, even Indra and all the gods and demons cannot defeat him. He is Shri Krishna Narayan and Arjun is considered to be a human. Narayan and human are one and the same entity, but for the welfare of the people, he has taken two bodies and appeared.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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