| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन » श्लोक 2-3 |
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| | | | श्लोक 5.49.2-3  | बृहस्पतिश्चोशना च ब्रह्माणं पर्युपस्थितौ।
मरुतश्च सहेन्द्रेण वसवश्चाग्निना सह॥ २॥
आदित्याश्चैव साध्याश्च ये च सप्तर्षयो दिवि।
विश्वावसुश्च गन्धर्व: शुभाश्चाप्सरसां गणा:॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | एक समय की बात है, बृहस्पति और शुक्राचार्य भगवान ब्रह्मा की सेवा में उपस्थित हुए। इन्द्र के साथ मरुद्गण, अग्नि, वसुगण, आदित्य, साध्य, सप्तऋषि, विश्वावसु गंधर्व तथा महान् अप्सराएँ भी वहाँ उपस्थित थीं। 2-3॥ | | | | Once upon a time, Brihaspati and Shukracharya attended the service of Lord Brahma. Along with Indra, Marudgana, Agni, Vasugana, Aditya, Sadhya, Saptarishi, Vishwavasu Gandharva and great Apsaras were also present there. 2-3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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