श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.49.18 
नारायणस्तथैवात्र भूयसोऽन्याञ्जघान ह।
एवमेतौ महावीर्यौ तौ पश्यत समागतौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार नारायण रूपी भगवान श्रीकृष्ण ने भी खाण्डव दाह के समय अनेक हिंसक प्राणियों को यमलोक भेज दिया था। इस प्रकार वे दोनों अत्यन्त शक्तिशाली हैं। दुर्योधन! इस समय वे दोनों एक-दूसरे से मिल गए हैं, इस बात को तुम्हें अच्छी तरह देखना और समझना चाहिए। 18.
 
Similarly, Lord Krishna in the form of Narayana had also sent many other violent creatures to Yamaloka at the time of Khandava Daah. Thus both of them are very powerful. Duryodhan! At this time both of them have joined each other, you should see and understand this thing very well. 18.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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