श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.49.17 
एष देवान् सहेन्द्रेण जित्वा परपुरञ्जय:।
अतर्पयन्महाबाहुरर्जुनो जातवेदसम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के नगर को जीतने वाले इन महाबाहु अर्जुन ने खाण्डवध के समय इन्द्र सहित सम्पूर्ण देवताओं को जीतकर अग्निदेव को पूर्णतः संतुष्ट कर दिया था ॥17॥
 
This mighty-armed Arjuna, who conquered the city of enemies, had completely satisfied Agnidev by conquering all the gods including Indra at the time of Khandavadah. 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas