श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.49.16 
एष पारे समुद्रस्य हिरण्यपुरमारुजत्।
जित्वा षष्टिं सहस्राणि निवातकवचान् रणे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में साठ हजार निवातकवचों को पराजित करके उन्होंने समुद्र के उस पार स्थित राक्षसों के हिरण्यपुर नगर को तहस-नहस कर दिया।
 
Having defeated sixty thousand Nivatakavachas in the battle, he devastated the city of Hiranyapur of the demons situated on the other side of the sea.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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