श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.49.15 
एष भ्रान्ते रथे तिष्ठन् भल्लेनापाहरच्छिर:।
जम्भस्य ग्रसमानस्य तदा ह्यर्जुन आहवे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस समय मनुष्य रूपी अर्जुन रथ पर बैठकर सब दिशाओं में घूम रहे थे, फिर भी उन्होंने सबको खाने वाले जम्भ नामक राक्षस का सिर अपने एक बाण से काट डाला।
 
At that time Arjuna in the form of a human being was seated on a chariot moving in all directions, yet he cut off the head of the demon named Jambha, who was devouring everyone, with one of his arrows. 15.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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