श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.49.14 
नर इन्द्रस्य संग्रामे हत्वा शत्रून् परंतप:।
पौलोमान् कालखञ्जांश्च सहस्राणि शतानि च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
एक समय मनुष्यरूपधारी और शत्रुओं को कष्ट देने वाले अर्जुन ने युद्ध में इन्द्र के शत्रु पौलोम और कालखंज नामक सैकड़ों-हजारों दैत्यों को मार डाला॥14॥
 
Once Arjuna, who was in the form of a human being and was a tormentor of his enemies, killed in a war hundreds and thousands of demons named Pauloma and Kalakhanja, who were inimical to Indra.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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