श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.49.12 
तावब्रूतां वृणीष्वेति तदा भरतसत्तम।
अथैतावब्रवीच्छक्र: साह्यं न: क्रियतामिति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! देवताओं की प्रार्थना सुनकर उन दोनों ऋषियों ने इन्द्र से कहा, ‘आप अपनी इच्छानुसार वर मांगिए।’ तब इन्द्र ने उनसे कहा, ‘हे प्रभु! कृपया हमारी सहायता कीजिए।’
 
O best of the Bharatas! On hearing the prayers of the gods, those two sages said to Indra, 'Ask for a boon according to your desire.' Then Indra said to them, 'O Lord! Please help us.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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