श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.49.11 
तदा देवासुरे युद्धे भये जाते दिवौकसाम्।
अयाचत महात्मानौ नरनारायणौ वरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों देवताओं और दानवों में युद्ध चल रहा था और देवतागण बहुत भयभीत थे; इसलिए उन्होंने दो महान आत्माओं नर और नारायण से वरदान मांगा।
 
In those days there was a war between gods and demons and the gods were very afraid; therefore they asked for a boon from the two great souls Nara and Narayan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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