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श्लोक 5.49.1  |
वैशम्पायन उवाच
समवेतेषु सर्वेषु तेषु राजसु भारत।
दुर्योधनमिदं वाक्यं भीष्म: शान्तनवोऽब्रवीत्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायन कहते हैं, 'भारत! वहाँ एकत्रित हुए समस्त राजाओं की सभा में शान्तनु नन्दन भीष्म ने दुर्योधन से यह बात कही। |
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| Vaishmpayana says, 'Bharata! In the assembly of all those kings gathered there, Shantanu Nandan Bhishma said this to Duryodhan. |
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