श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  5.48.94 
न चेदिमं पुरुषं कर्मबद्धं
न चेदस्मान् मन्यतेऽसौ विशिष्टान्।
आशंसेऽहं वासुदेवद्वितीयो
दुर्योधनं सानुबन्धं निहन्तुम्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
यदि दुर्योधन यह न मानता हो कि मनुष्य कर्म के बन्धनों से बंधा हुआ है अथवा वह हमें अपने से श्रेष्ठ और बलवान न मानता हो, तो भी मैं आशा करता हूँ कि भगवान श्रीकृष्ण को अपना सहायक बनाकर मैं दुर्योधन को उसके बन्धुओं सहित मार डालूँगा॥ 94॥
 
If Duryodhana does not believe that a man is bound by the bonds of karma or if he does not believe us to be superior and stronger than himself, still I hope that with Lord Krishna as my helper I shall kill Duryodhana along with his relatives.॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)