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वास: कृच्छ्रो विहितश्चाप्यरण्ये
दीर्घं कालं चैकमज्ञातवर्षम्।
ते हि कस्माज्जीवतां पाण्डवानां
नन्दिष्यन्ते धार्तराष्ट्रा: पदस्था:॥ ९२॥
अनुवाद
हम लोग बहुत समय से वन में रहकर महान कष्ट सह रहे हैं और एक वर्ष तक वनवास भी करना पड़ा है। ऐसी स्थिति में पाण्डवों के जीवित रहते कौरव अपने पद का उपभोग कैसे कर सकेंगे?॥92॥
‘We have been living in the forest for a long time, suffering great hardships, and have had to live in exile for a year. In such a situation, how will the Kauravas continue to enjoy their positions while the Pandavas are alive?॥92॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥