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mahabharat 5.48.90: मैं शान्तनुपुत्र भीष्म को, द्रोणाचार्य को, अपने गुरु अश्वत्थामा को तथा जिनका सामना कोई नहीं कर सकता उन पराक्रमी कृपाचार्य को प्रणाम करूँगा और राज्य प्राप्ति की इच्छा से अवश्य युद्ध करूँगा॥ 90॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  5.48.90 
नमस्कृत्वा शान्तनवाय राज्ञे
द्रोणायाथो सहपुत्राय चैव।
शारद्वतायाप्रतिद्वन्द्विने च
योत्स्याम्यहं राज्यमभीप्समान:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
मैं शान्तनुपुत्र भीष्म को, द्रोणाचार्य को, अपने गुरु अश्वत्थामा को तथा जिनका सामना कोई नहीं कर सकता उन पराक्रमी कृपाचार्य को प्रणाम करूँगा और राज्य प्राप्ति की इच्छा से अवश्य युद्ध करूँगा॥ 90॥
 
I will pay my obeisance to Shantanu's son Bhishma, to Drona, to my teacher Ashwatthama, and to the valiant Kripacharya, who cannot be confronted by anyone, and with the desire to gain the kingdom, I will certainly fight.॥ 90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)